शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए युवा कार्यकर्ताओं द्वारा शांति बांड (पीस बॉन्ड) पर हस्ताक्षर किए जाने को लेकर हो रही आलोचना का कड़ा जवाब दिया है। पार्टी ने कहा है कि ऐसे कानूनी मुचलके भरने का मतलब यह कतई नहीं है कि कार्यकर्ताओं ने अपनी गलती मान ली है या वे अधिकारियों के सामने झुक गए हैं।
Democratic Rights – ‘सामना’ के संपादकीय में कार्यकर्ताओं का जोरदार बचाव
पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में मंगलवार को प्रकाशित एक संपादकीय के जरिए शिवसेना (UBT) ने उन आलोचनाओं पर कड़ी आपत्ति जताई, जिनमें शांति बांड पर हस्ताक्षर करने वाले कार्यकर्ताओं पर सवाल उठाए जा रहे थे। पार्टी ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद रिहाई के लिए इस तरह के निवारक कानूनी उपायों का सहारा लेना किसी की कमजोरी या वैचारिक समर्पण की निशानी नहीं है।
Democratic Rights – अपराध की स्वीकारोक्ति या अधिकारों का समर्पण नहीं है बांड
शिवसेना (UBT) ने अपने लेख में जोर देकर कहा कि पुलिस या प्रशासन द्वारा शांति बनाए रखने के लिए भरवाए जाने वाले बांड को कभी भी अपराध की स्वीकारोक्ति या लोकतांत्रिक अधिकारों के त्याग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह केवल कानूनी प्रक्रिया का एक हिस्सा है जिसके तहत औपचारिक औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।
Democratic Rights – लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर
पार्टी ने यह भी कहा कि देश में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले नागरिकों और कार्यकर्ताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है। इस प्रकार की कानूनी बाध्यताओं को आधार बनाकर कार्यकर्ताओं की आलोचना करना और उनके संघर्ष पर सवाल उठाना पूरी तरह से अनुचित है।
(48361)