
नाटक -ए- तलवार की फ़ोटोबाज़ी करते हुए बाबा बंगाली और गुर्गा -ए- बंगाली शब्बीर अंसारी
शाहिद अंसारी
मुंबई : अंडरवर्ल्ड , भूमाफिया , वक्फ़ माफिया , चीटर बिल्डर की कॉकटेल अवार्ड सेरेमनी जिसमें महाराष्ट्र के दूध विकास मंत्री और राष्ट्रीय समाज पक्ष के नेता महादेव जानकर अएवार्ड को धोखे से बुलाकर इन सब को अवार्ड दिलाने की को कोशिश की गई थी वह नाकाम हो गई क्योंकि इनकी कुंडली जानकर के पास पहुंच चुकी थी जिसके बाद वह इस कार्यक्रम मे शामिल नहीं हुए।
ध्यान रहे Bombay Leaks ने अवार्ड सेरेमनी की ख़बर प्रकाशित की थी और यह भी लिखा था कि इस अवार्ड सेरेमनी में चीटर बिल्डर तबरेज़ रबरवाला को वक्फ़ माफिया और गुर्गा-ए-बंगाली शब्बीर अंसारी और बाबा बंगाली गैंग का सरग़ना आज़ाद मैदान दंगों और हत्या का आरोपी तोड़ु-ए-नागपाड़ा भूमाफिया तथा कथित धर्मधुरंधर श्री मुईन अशरफ़ उर्फ़ बाबा बंगाली अवार्ड दिलाने के साज़िश कर रहे थे जिसे Bombay Leaks ने बेनकाब कर दिया नतीजा यह हुआ कि जानकर ने दूरी बना ली जिसके बाद दोनों की जम कर थू थू हो रही है।

महादेव जानकर के न आने पर बाबा बंगाली द्वारा चीटर बिल्डर तबरेज़ रबरवाला को अवार्ड और अशिर्वाद का लॉलीपॉप देते हुए
अवामी विकास पार्टी के अध्यक्ष शमशेर पठान ने कहा कि यह एक साज़िश थी जानकर के खिलाफ़ जिसकी सुपारी शब्बीर अंसारी और बाबा बंगाली ने ली थी ताकि वह किसी तरह से उनके हाथों चीटर और ब्लैकलिस्टेड बिल्डर तबरेज़ रबरवाला को और अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों को अवार्ड दिला कर उनकी फोटो वायरल करेंगे ताकि उनका मंत्री पद छिन जाए लेकिन खुशी की बात यह है कि उन्हें इस बात का अंदाज़ा हो गया कि यह अवार्ड सेरेमनी अंडरवर्ल्ड , भूमाफिया , वक्फ़ माफिया , चीटर बिल्डर की कॉकटेल है जिससे दूर रहने में उन्होंने भलाई समझी।
पठान ने कहा कि इस कॉकटेल कार्यक्रम में यह भी देखने को मिला कि बाबा बंगाली फिर तलवार बांट रहा है उसके साथ साथ और भी लोग शामिल हैं इससे पहले बंगाली बाबा ने अपने आश्रम में इसी तरह से किसी को तलवार बांटी थी। देश में मुसलमानों के जो हालात हैं उसको देख कर हमें यह अंदाज़ा लगाना चाहिए कि बंगाली ऐसे हालात का फाएदा उठा कर कहीं दंगे न भड़काए इसलिए राज्य के मुख्यमंत्री और मुंबई पुलिस कमिश्नर से इस बात की मांग करता हूं कि बंगाली के आश्रम में और आश्रम की गुफा में तलाशी लेकर इस बात का पता लगाऐं कि और कितनी तलवारें उसने छुपा रखी हैं ताकि समय रहते बंगाली की मंशा का पता चल सके और उसके द्वारा रची गई साज़िश का पर्दा फाश हो।
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