मुंबई के दादर, प्रभादेवी और माहिम इलाकों में बीएमसी की कार्रवाई के कुछ ही हफ्तों बाद फुटपाथ एक बार फिर अवैध फेरीवालों के कब्जे में आ गए हैं। त्योहारों के सीजन के चलते हालात और ज्यादा खराब हो गए हैं, जिससे पैदल चलने वाले लोगों को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
Dadar’s footpaths – बीएमसी के अभियान का असर खत्म, लौटे फेरीवाले
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगस्त महीने में बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े द्वारा चलाए गए ‘पेड्स्ट्रियन फर्स्ट’ अभियान से कुछ राहत जरूर मिली थी, लेकिन यह राहत सिर्फ एक-दो महीने ही टिक सकी। त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही रानाडे रोड, डी सिल्वा रोड और एन.सी. केलकर रोड जैसे प्रमुख रास्तों पर फेरीवाले फिर से लौट आए हैं, जिससे फुटपाथ एक बार फिर गायब हो गए हैं।
Dadar’s footpaths – यातायात बाधित, छोटे सफर में लग रहा लंबा समय
फुटपाथों पर अवैध अतिक्रमण और सड़कों पर खड़े दोपहिया वाहनों के कारण ट्रैफिक की रफ्तार भी बेहद धीमी पड़ गई है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि गोखले रोड से रानाडे रोड का चंद मिनटों का सफर तय करने में अब 15 से 20 मिनट का समय लग रहा है, जिससे रोजाना आवागमन करने वाले ऑफिस जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
Dadar’s footpaths – नागरिकों की मांग- हो नियमित निगरानी और वेंडिंग जोन तय
‘चकाचक दादर’ के संस्थापक चेतन कांबले समेत कई स्थानीय नागरिकों और संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल दिखावटी तोड़फोड़ कार्रवाई के बजाय फुटपाथों पर नियमित निगरानी रखी जाए और फेरीवालों के लिए स्पष्ट वेंडिंग जोन तय किए जाएं। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो स्थिति और बदतर हो जाएगी।
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