India Fighter Jet Gap – चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर दोहरे मोर्चे (Two-Front Threat) की सामरिक चुनौतियों के बीच भारतीय वायुसेना (IAF) में लड़ाकू विमानों की घटती स्क्वाड्रन संख्या एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। भारतीय वायुसेना को राष्ट्रीय सुरक्षा के तय मानकों के अनुसार 42 लड़ाकू स्क्वाड्रनों की स्वीकृत संख्या की आवश्यकता है, लेकिन पुराने सोवियत मूल के मिग-21, मिग-29 और जगुआर विमानों के चरणबद्ध रिटायरमेंट के कारण यह संख्या घटकर 30 से भी नीचे पहुंच चुकी है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों के निर्माण और विदेशी बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों (MRFA) की खरीद प्रक्रिया के बीच संतुलन साधने की कोशिशों के बावजूद वायुसेना के लड़ाकू बेड़े में पैदा हो रहा यह तकनीकी व संख्यात्मक अंतर (Fighter Jet Gap) सामरिक रणनीतिकारों के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है।
India Fighter Jet Gap – पुराने विमानों का तेजी से रिटायरमेंट दोहरे मोर्चे पर शक्ति संतुलन बनाए रखने की चुनौती
वायुसेना के बेड़े से मिग-21 बाइसन की आखिरी स्क्वाड्रनों की विदाई और आने वाले वर्षों में जगुआर तथा मिराज-2000 विमानों के सेवामुक्त होने से वायुसेना की परिचालन क्षमता पर भारी दबाव पड़ रहा है। दूसरी ओर, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स (PLAAF) तेजी से जे-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों और जे-16 की तैनाती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब बढ़ा रही है। साथ ही पाकिस्तान भी चीनी जे-10सी और उन्नत ब्लॉक-3 जेएफ-17 विमानों को शामिल कर अपनी हवाई ताकत को आधुनिक बना रहा है। ऐसे में भारतीय वायुसेना के पास सुखोई-30 एमकेआई और राफेल की अत्याधुनिक क्षमताएं होने के बावजूद कुल विमानों की संख्या में आ रही गिरावट हवाई प्रभुत्व (Air Superiority) बनाए रखने में बाधा बन सकती है।
India Fighter Jet Gap – तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में इंजन सप्लाई की अड़चन; एचएएल पर उत्पादन तेज करने का दबाव
लड़ाकू विमानों की कमी की भरपाई के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 83 और अतिरिक्त 97 तेजस एमके-1ए विमानों का ऑर्डर दिया गया है। हालांकि, अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस से एफ404 इंजनों की आपूर्ति श्रृंखला में आए वैश्विक व्यवधान के कारण तेजस की डिलीवरी तय समयसीमा से कुछ पीछे चल रही है। हालांकि इंजन आपूर्ति को पटरी पर लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक एचएएल सालाना 24 से अधिक विमानों का निर्माण शुरू नहीं करता, तब तक केवल तेजस के दम पर तेजी से खाली हो रही स्क्वाड्रनों की भरपाई करना आसान नहीं होगा। इसके अलावा, उन्नत तेजस एमके-2 और पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को पूरी तरह सेवा में आने में अभी कुछ वर्षों का समय बाकी है।
India Fighter Jet Gap – 114 लड़ाकू विमानों का एमआरएफए टेंडर; रक्षा मंत्रालय के सामने त्वरित निर्णय की अनिवार्यता
वायुसेना लंबे समय से 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की वकालत कर रही है, जिसे ‘मेक इन इंडिया’ और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत भारत में ही निर्मित किया जाना है। इस दौड़ में फ्रांस का राफेल, अमेरिका का एफ-15ईएक्स व एफ-21, स्वीडन का ग्रिपेन-ई और यूरोफाइटर टाइफून शामिल हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि खरीद प्रक्रिया की जटिलताओं और भारी लागत को देखते हुए सरकार को तत्काल निर्णय लेना होगा। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का सुझाव है कि या तो राफेल के अतिरिक्त स्क्वाड्रनों का सीधा सरकारी समझौता (G2G Deal) किया जाए या एमआरएफए प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर मंजूरी दी जाए, ताकि हिंद-प्रशांत और हिमालयी सीमाओं पर भारत की हवाई रक्षा अभेद्य बनी रहे।
(56790)